एक परिचय

परिचय एवं उपलब्धियाँ

राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केन्द्र , मुजफ्फरपुर राष्ट्रीय स्तर पर लीची अनुसंधान और विकास को नेतृत्व प्रदान करने हेतु भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की एक प्रमुख संस्थान है। यह लीची के उत्पादन, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन के बारे में जानकारी के लिए एक राष्ट्रीय-कोष के रूप में भी कार्य करता है, और अंत-उपयोगकर्ताओं के लिए परामर्श सेवाएं प्रदान करता है.

विकास और उत्पत्ति

interoductionराष्ट्रीय लीची अनुसंधान केन्द्र की स्थापना 6 जून 2001 को तत्कालीन कृषि मंत्री, भारत सरकार श्री नीतिश कुमार द्वारा किया गया था। 6 जून, 2001 कृषि मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा छठी योजना के अंत में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के तत्वावधान में लीची पर अनुसंधान और विकास के लिए एक नोडल संस्था के रूप में कार्य करने के लिए किया गया। केंद्र ने वर्ष 2002 में बजटीय आवंटन और पहले बैच के दो वैज्ञानिकों के साथ कार्य करना शुरू कर दिया।  25 जून, 2002 को आईसीएआर और बिहार सरकार के बीच ‘लीज डीड’ पर हस्ताक्षर हुई जिसके तहत केंद्र को 100 एकड़ भूमि का हस्तांतरण मुशहरी फार्म पर किया गया। वर्तमान में, केन्द्र पर 14 वैज्ञानिक, 3 तकनीकी,  8 प्रशासनिक कर्मचारी और 3 कुशल सहायक कर्मी हैं जबकि स्वीकृत संख्या क्रमशः 15, 14, 12 और 10 है। विभिन्न विषयों के वैज्ञानिक यथा – बागवानी, मृदा विज्ञान, पादप रोग विज्ञान, कीट विज्ञान, जैव प्रौद्योगिकी, आनुवांशिकी एवं पादप प्रजनन, की टीम लीची के चहुंमुखी विकास के लिए सतत एवं क्रमबद्ध अनुसंधान के साथ नई-नई तकनीकों के विकास और प्रसार के लिए तत्पर हैं।

विजन, मिशन एवं अधिदेश

विजन (Vision)

लीची उत्पादको और व्यापारियों के लिए आजीविका, सुरक्षा और समृद्धि हेतु भाकृअनुप-राष्ट्रीय लीची केन्द्र को लीची अनुसंधान, विस्तार तथा कौशल विकास के क्षेत्रों में एक उत्कृष्ट केन्द्र के रूप में विकसित करना ।

मिशन (Mission)

लीची के टिकाऊ उत्पादन, उद्योग एवं व्यवसाय हेतु परस्पर अनुसंधान एंव प्रसार गतिविधियों द्वारा गुणवत्तायुक्त उत्पादन, प्रसंस्करण, एवं उपयोग विविधता के लिए विज्ञान एवं तकनिकी का दोहन (उपयोग करना) ।

अधिदेश (Mandate)

लीची आनुवांशिक संसाधन के संग्रहण-कोष के रूप में कार्य करना तथा उत्पादकों, उद्योगों  एवं निर्यातकों के लिए फसल उत्पादन और तुड़ाई-उपरांत प्रबंधन हेतु मिशन मोड में एकल खिड़की समाधान प्रदान करना ।

अनुसंधान उपलब्धियाँ

 केन्द्र ने पिछले 13 वर्षो में योजनाबद्व तरीके से किस्मों के संग्रहण (52), तकनीकों के विकास (10), गुणवत्तापूर्ण पौध सामग्री का विकास (1.5 लाख), के साथ-साथ राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर की अनेक परियोजनाओं के द्वारा लीची तथा अन्य फल फसलों पर महत्वपूर्ण ज्ञान-कौशल का विकास किया है । केन्द्र के वैज्ञानिकों ने अपने-अपने परियोजना क्षेत्र में अभूतपूर्व कार्य किये हैं और यह प्रयास अनवरत रुप से जारी है । वैज्ञानिकों तथा क्षेत्र के लीची उत्पादक किसानों के परस्पर सहयोग से लीची के क्षेत्रफल एवं उत्पादन में बढ़ोत्तरी हुई है तथा गुणवत्ता में सुधार हुआ है । लीची में अनेक प्रकार से मूल्य सम्बर्धन द्वारा नुकसान के प्रतिशत में कमी आई है। केन्द्र की कुछ महत्वपूर्ण उपलब्धियों में, जननद्रव्यों का संग्रहण, अध्ययन, किस्म सुधार, मधुमक्खी का लीची उत्पादन में सहभागिता, नई पौध प्रवर्द्धन तकनीकी, छत्रक प्रबंधन, पुराने बागो का जीर्णोद्धार, अन्तर्वर्ती फसलें, फलों का दैहिक विकारों से रोकथाम, नाशीकीट एवं रोग प्रबंधन, जैविक जीवनाशी क विकास और प्रयोग, परिपक्वता मानकों का मानकीकरण, तुड़ाई उपरान्त क्षति रोकने हेतु प्रबंधन एवं मूल्यवर्द्धित पदार्थों का विकास प्रमुख है।   इनमें से कुछ का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत है:

पारस्परिक सहयोग एवं संबंध

 राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केन्द्र विभिन्न राष्ट्रीय एवं अर्न्तराष्ट्रीय संस्थाओं के साथ परस्पर सहयोग से कार्य कर रहा है इनमें राजेन्द्र कृषि विश्वविधालय, पूसा, बिहार कृषि विश्वविधालय, सबौर, राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड, गुड़गाँव, कृषि उत्पाद एवं प्रसंस्करण संस्था, नई दिल्ली, राष्ट्रीय बागवानी मिशन, बिहार पूर्वी क्षेत्र के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान का शोध, परिसर पटना, ,खाद्य एवं कृषि संगठन, नई दिल्ली वायोवर्सिटी इण्टरनेशनल, नई दिल्ली इत्यादि प्रमुख है। इस वर्ष केन्द्र ने राष्ट्रीय कृषि जैव प्रौद्योगिकी संस्थान, मोहाली से फसल सुधार की दिशा में परस्पर शोध कार्यक्रम चलाने के लिए समझौता किया तथा सैमहिंगिस बाटम कृषि एवं विज्ञान प्रौद्योगिकी संस्थान, इलाहाबाद से बागवानी की पढ़ाई और शोध के लिए समझौता किया।

प्रौद्योगिकी हस्तान्तरण

 विगत कई सालो में राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केन्द्र अपने प्रागण में आयोजित एवं अन्य संस्थानों के द्वारा आयोजित तकनीकी प्रसार गतिविधियों में भाग लेते रहे हैं । केन्द्र के द्वारा किसानों के प्रशिक्षण एवं भ्रमण के अतिरिक्त दैनिक सामाचार पत्रों एवं दूरदर्शन कार्यक्रमों आदि के माध्यम से लीची तकनीक को जनमानस तक पहुँचाने का कार्य किया जाता रहा है । उत्तम कृषि क्रियाओं, बगीचों का जीर्णोद्वार तथा तुड़ाई के बाद फल सम्भलाव के दिशा में किसानों का विशेष प्रशिक्षण आयोजित करके केन्द्र ने उन्हें नवीनतम ज्ञान-कौशल से अवगत कराया।

अन्य गतिविधियाँ

 राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केन्द्र मुजफ्फरपुर, राजभाषा हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिये समय समय पर राजभाषा कार्यान्वयन समिति की बैठकें, हिन्दी चेतना मास के अलावा अनेक कार्यशालाओ, प्रतियोगिताएं आदि का आयोजन किया तथा विजेताओं को पुरस्कृत भी किया गया। अन्य राज्यों में लीची के अत्पादन को बढ़ावा देने के लिए केन्द्र ने अनेक प्रयास किये जिनमें पंजाब, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, केरल तथा गुजरात राज्यों में वैज्ञानिकों ने किसानों के साथ सम्पर्क स्थापित करके प्रशिक्षण का कार्यक्रम किया।

आधारभूत संरचना विकास

 केन्द्र ने आणविक चरित्र प्रतिरूपण तथा जैव प्रौद्योगिकी संबंधी अध्ययन के लिए प्रयोगशाला स्थापित करने की दिशा में प्रयास किया। साथ ही साथ पादप रोग विज्ञान, मृदा विज्ञान, तुड़ाई उपरान्त फल सम्भलाव, आदि प्रयोगशालाओं के सुदृढ़ीकरण का कार्य किया गया। केन्द्र ने रोग कारकों के पृथक्ककरण एवं अध्ययन के लिए शीश घर, कीट अध्ययन गृह जैसी बुनियादी सुविधाओं का विकास किया । शोध क्षेत्र में प्रणालीबद्ध शोध कार्यक्रम के लिए लगभग 20 एकड़ क्षेत्र में तालाबों तथा खेतों का निर्माण कराया गया तथा तुड़ाई उपरान्त कार्यशाला, गन्धकीकरण कक्ष, शहद प्रसस्करण यंत्र, लीची छिल्का उतारने का यंत्र, आदि को स्थापित किया गया।    

पुस्तकालय

केंद्र पर एक अच्छी पुस्तकालय है जिसमें  लीची  एवं उद्यानिकी संबन्धित हिन्दी और अँग्रेजी में पुस्तकें एवं शोध सामाग्री उपलब्ध हैं । यहाँ लगभग 1340 पुस्तकों के नवीनतम संस्करण के साथ संदर्भ पुस्तक, 16 इनसाइक्लोपीडिया, 30 ब्रिटानिका भाग उपलब्द्ध हैं। वर्तमान में 11 भारतीय और 11 अंतर्राष्ट्रीय शोध जर्नल पुस्तकालय में आते हैं। इसके अलावा केंद्र द्वारा प्रकाशित सभी किताब, बुलेटिन प्रसार पुस्तिका एवं शोध पत्र  शोधार्थियों, प्रसार से जुड़े लोगों और किसानों के लिए उपलब्ध हैं ।

कृषि ज्ञान प्रबंधन इकाई

केंद्र पर कृषि ज्ञान डेटाबेस से संबन्धित एक बेहतरीन कृषि ज्ञान प्रबंधन इकाई (ए.के.एम.यू.) कार्यरत है जिसमें अन्तराष्ट्रिय स्तर के  सॉफ्टवेर  जैसे एस.ए.एस. स्टाटिस्टिकल सॉफ्टवेर, एफ.एम.एस.-एम.आइ.एस. सॉफ्टवेर, कैव एब्स्ट्राक्ट, हॉर्टिकल्चर एब्स्ट्राक्ट और कई कम्प्यूटिंग सॉफ्टवेर शामिल लैन द्वारा जुड़े हैं।  केंद्र के पास अपना सर्वर भी है।  इंटरनेट की सुविधा के लिए यहाँ एन.के.एन. की 24×7 अनवरत फास्ट कनेक्टिविटी है। केंद्र की वैबसाइट (http://nrclitchi.org) विश्वभर के लाखों यूजर्स प्रतिदिन प्रयोग में लाते हैं ।